➤ हिमाचल में बारिश का दौर जारी, धर्मशाला में 87.2 और कांगड़ा में 68.8 मिलीमीटर बारिश
➤ रामपुर के फांचा कंडा में भारी भूस्खलन, करीब 50 पेड़ गिरे; जंगल को भारी नुकसान
➤ मानसून में अब तक 296 मौतें, 67 सड़कें बंद; 12 से 17 सितंबर तक बारिश के आसार
हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच कई हिस्सों में बारिश का दौर लगातार जारी है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। धर्मशाला में सबसे अधिक 87.2 मिलीमीटर, कांगड़ा में 68.8 मिलीमीटर और कुफरी में 64.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। बारिश के कारण जहां कई क्षेत्रों में मौसम सुहावना हुआ है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाओं ने परेशानी बढ़ाई है।
रामपुर बुशहर उपमंडल की फांचा पंचायत के नंती और फांचा कंडे के बीच वन विभाग की भूमि पर भारी भूस्खलन हुआ है। भूस्खलन की चपेट में आने से करीब 50 पेड़ भरभराकर गिर गए। इससे वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। यह घटना करीब तीन दिन पहले हुई थी, जिसका वीडियो अब सामने आने के बाद वायरल हो रहा है।
उधर, शिमला-शिपकी ला नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी नाला के पास भारी चट्टानें गिरने से करीब चार घंटे तक यातायात बाधित रहा। इस दौरान किन्नौर से सेब लेकर निचले क्षेत्रों की ओर जा रहे वाहन, निगम की बसें और पर्यटकों के वाहन भी जाम में फंसे रहे। राहत की बात यह रही कि भूस्खलन की चपेट में कोई वाहन नहीं आया।
धर्मशाला में 87.2 मिलीमीटर बारिश, कई इलाकों में झमाझम
प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। धर्मशाला में 87.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो इस अवधि में सबसे अधिक रही। इसके अलावा कांगड़ा में 68.8, कुफरी में 64.6 और शिलारू में 54.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
जोगिंद्रनगर में 48.0, मालरांव में 45.0, पालमपुर में 40.0, स्लापड़ में 27.8 और सराहन में 27.3 मिलीमीटर बारिश हुई। नगरोटा सूरियां में 25.8, कोटखाई में 24.2, श्री नयना देवी में 22.2 और शिमला में 18.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
राजधानी शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को धूप खिली रही, हालांकि आसमान में हल्के बादल भी छाए रहे। दूसरी ओर ऊना जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं के साथ हुई भारी बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई।
रामपुर के फांचा कंडा में भूस्खलन से 50 पेड़ धराशायी
रामपुर बुशहर उपमंडल की फांचा पंचायत के नंती और फांचा कंडे के बीच वन विभाग की जमीन पर भारी भूस्खलन हुआ। भूस्खलन इतना व्यापक था कि इसकी चपेट में जंगल का एक बड़ा हिस्सा आ गया और करीब 50 पेड़ गिर गए।
बताया जा रहा है कि घटना करीब तीन दिन पहले हुई थी, लेकिन इसका वीडियो अब सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बरसात के दौरान छोटे स्तर पर भूस्खलन होता रहा है। इस बार भूस्खलन ने जंगल के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।
फांचा पंचायत के उपप्रधान सुभाष नेगी ने बताया कि नंती और फांचा कंडा के बीच यह घटना करीब तीन दिन पहले हुई थी। उनके अनुसार भूस्खलन की वजह से करीब 50 पेड़ गिर गए हैं। उन्होंने कहा कि इस जगह पर कई वर्षों से भूस्खलन की समस्या बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा उपाय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस स्थान पर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जंगल के इस हिस्से को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
एनएच-5 पर चट्टानें गिरने से चार घंटे थमा यातायात
बारिश के बीच शिमला-शिपकी ला नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी नाला के पास भारी भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हुआ। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे पहाड़ से भारी-भरकम चट्टानें और मलबा हाईवे पर आ गिरा। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
गनीमत रही कि जिस समय चट्टानें हाईवे पर गिरीं, उस समय कोई वाहन इसकी चपेट में नहीं आया। हालांकि, सड़क बंद होने के कारण दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रुक गई।
इन दिनों किन्नौर से सेब से लदे वाहन निचले क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं। भूस्खलन के कारण ऐसे कई वाहन जाम में फंस गए। इसके अलावा किन्नौर की ओर जा रही निगम की बसें और पर्यटकों के कई वाहन भी यातायात बाधित होने के कारण रास्ते में रुक गए।
घटना की सूचना किसी तरह एनएचएआई के ज्यूरी डिवीजन के एसडीओ तक पहुंची। इसके बाद करीब चार मशीनें मौके पर भेजी गईं। मशीनों की मदद से हाईवे से चट्टानों और मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। करीब सुबह 7 बजे हाईवे की एक लेन से यातायात बहाल कर दिया गया।
मानसून में आपदा ने ली 296 लोगों की जान
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान का सिलसिला भी जारी है। 30 जून से 11 सितंबर तक प्रदेश में आपदा की वजह से 296 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 520 लोग घायल हुए हैं।
इनमें अकेले 177 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। बारिश और आपदा से प्रदेश में आवासीय संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस अवधि में 40 पक्के और 89 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इसके अलावा 499 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्रदेश में 17 दुकानों और 470 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस मानसून में हिमाचल प्रदेश में हुए नुकसान का कुल आंकड़ा 1,66,196.72 लाख रुपये तक पहुंच गया है। लगातार बारिश, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
12 से 17 सितंबर तक जारी रहेगा बारिश का दौर
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में 12 से 17 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। 18 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने के आसार हैं।
यानी आने वाले दिनों में भी पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील सड़कों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी।
67 सड़कें बंद, 142 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित
बारिश के कारण प्रदेश का सड़क और बिजली नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार शनिवार सुबह 10 बजे तक प्रदेश में 67 सड़कें बाधित थीं।
इसके अलावा 142 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक सड़कें मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में प्रभावित बताई गई हैं। लगातार बारिश के बीच सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
किन्नौर में सेब सीजन के चलते सड़कें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। एनएच-5 पर भूस्खलन के कारण सेब से लदे वाहनों का फंसना बागवानों और कारोबारियों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।
सामान्य से 11 फीसदी कम हुई मानसूनी बारिश
दिलचस्प बात यह है कि भारी बारिश और आपदा के बावजूद इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। 12 सितंबर तक की अवधि के लिए प्रदेश में सामान्य बारिश 678.4 मिलीमीटर मानी जाती है, जबकि इस दौरान वास्तविक बारिश 603.7 मिलीमीटर दर्ज की गई।
जिलावार स्थिति में बिलासपुर, कुल्लू, शिमला और सिरमौर में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। वहीं चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, मंडी, सोलन और ऊना में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इस तरह प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश के कारण भूस्खलन और अन्य आपदाओं का खतरा बढ़ा है, जबकि कई जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है।
बारिश और भूस्खलन के बीच अगले कुछ दिन अहम
हिमाचल में मानसून का दौर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। 12 से 17 सितंबर तक बारिश का पूर्वानुमान, कई सड़कों के बाधित होने और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन की घटनाओं के बीच अगले कुछ दिन प्रशासन और आम लोगों के लिए अहम रहने वाले हैं।
रामपुर के फांचा कंडा में जंगल का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में आना और एनएच-5 पर चट्टानों का गिरना बताता है कि बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खिसकने का खतरा बना हुआ है। वहीं प्रदेश में अब तक 296 मौतों और 1,66,196.72 लाख रुपये के नुकसान का आंकड़ा मानसून की गंभीरता को भी दर्शाता है।



